दक्षिण दिशा क्यों उत्तम मानी जाती है – रविन्द्र दाधीच

दक्षिण दिशा क्यों उत्तम मानी जाती है – रविन्द्र दाधीच
दक्षिण दिशा क्यों उत्तम मानी जाती है – रविन्द्र दाधीच
दक्षिण दिशा के संबंध में वास्तु शास्त्र के ग्रंथ कहते हैं। कि यह दिशा शक्ति, साहस और अपार धन प्रदान करने वाली दिशा होती है। क्योंकि  ध्यान से देखे तो सबसे ज्यादा धन व पराक्रम दक्षिण दिशा में ही है। 
दक्षिणमुखी में निवास करने वाले लोग थोड़े समय के पश्चात उन्नति करते हैं। ऐसा देखा गया है, कि  प्रायः वही लोग सबसे आगे उन्नति करते हैं। 
घर का मुखिया यदि घर की दक्षिण दिशा में निवास करता है। तो वह उसके लिए बहुत अच्छा होता है। क्योंकि दक्षिण दिशा घर के मुखिया को साहस प्रदान करती है। और उनको नियंत्रित करके आय के नये-नये स्त्रोत खोलती है। अब ऐसे में यदि परिवार का मुखिया घर के दक्षिण में निवास करेगा तो पूरा परिवार घर के मुखिया के नियंत्रण में रहेगा। जिससे जीवन अधिक बेहतर होगा। वास्तु के अनुसार मंत्रशाक्ति और साधना के लिए दक्षिण दिशा विशेष फलदायी होती है।
1. व्यापारी वर्ग के लिए दक्षिण दिशा शुभ होती है। इस दिशा में बनी व्यवसायिक इमारतें बहुत अच्छी तरक्की करती हैं। 
2. भारत के कई शहरों में ऐसी रोड (सड़के) हैं, जो पॉर्श लोकेशन में आती हैं। जहां एक तरफ तो उत्तरमुखी और दूसरी ओर दक्षिणमुखी मकान, दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस , कारखाने बने होते हैं। जिसमें देखने को मिलता है, उत्तर वालों की अपेक्षा दक्षिणमुखी द्वार वर्ग अधिक सफल है,
3. दक्षिण की दिशा कुछ समयान्तराल के उपरांत तरक्की करने वाली दिशा होती है। किसी भी देश का , गांव का , कॉलोनी का सबसे लेट डेवलपमेंट होगा। परंतु सबसे आगे दक्षिण ही होगा। आप देखें कि दक्षिण भारत, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण मुंबई, दक्षिणी दिल्ली, दक्षिणी कोलकत्ता सब जगह अंत में विकास हुआ है। परंतु सबसे आगे दक्षिणी क्षेत्र ही है। 
4. दक्षिणीमुखी मकान एक दो पीढ़ियों के लिए तो लाभकारी होते हैं। परंतु उसके बाद वाली तीसरी पीढ़ी के लिए लाभ की संभावना नही होती है। इसलिए तीसरी पीढ़ी वालों को लगातार दक्षिणीमुखी मकान में निवास करना शुभफलदायी नही होता है। 
5. दक्षिणमुखी फ्लैट (अपार्टमेंट) का वास्तु प्रायः ठीक होता है। परंतु फ्लैट का दरवाजा दक्षिणमुखी न हो और ईशान कोण में वास्तु दोष नही होने चाहिए।