माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों की सहायता और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ई-पोर्टल लॉन्च किया

डिजिटल भुगतान: किसानों को भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाएगा, जिससे पारदर्शी और कुशल वित्तीय लेनदेन सुनिश्चित होगा।

माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों की सहायता और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ई-पोर्टल लॉन्च किया
माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों की सहायता और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ई-पोर्टल लॉन्च किया
NAFED और NCCF जैसी सरकार समर्थित सहकारी समितियाँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
 
नई दिल्ली : भारत के केंद्रीय गृह मंत्री व सहकारिता मंत्री  अमित शाह के नेतृत्व में एक पहल ने 4 जनवरी, 2024 को ई-पोर्टल लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य किसानो का पंजीकरण कर  खरीद और सीधे भुगतान की सुविधा प्रदान करना है। किसान, विशेषकर वे जो दलहन और अरहर दाल के उत्पादन में शामिल हैं उनके लिए यह बहुत लाभकारी योजना है 
पहल की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:
1. ई-पोर्टल: किसानों का पंजीकरण, खरीद व सीधे भुगतान करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए ई-पोर्टल की शुरूआत।
 
2. स्टॉक पंजीकरण:पोर्टल का लक्ष्य किसानो के उपलब्ध उत्पादों को पंजीकृत करना है l दालो की खरीद सरकार समर्थित सहकारी समितियों जैसे NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) और NAFED (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया) द्वारा की जाएगी। निजी कंपनियां जैसे कि एग्रीबिड,जो किसानों को सशक्त बनाने और उनकी जीवन शैली बेहतर बनाने का काम कर रही हैं, जो एनसीसीएफ से जुड़ी है, जो विभिन्न वस्तुओं की खरीद में और सहायता करेगी।
 
3. मूल्य निर्धारण: गतिशील मूल्य निर्धारण और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का संयोजन बाजार की गतिशीलता और स्थिरता की आवश्यकता दोनों को ध्यान में रखते हुए एक अधिक अनुकूली मूल्य निर्धारण तंत्र प्रदान करेगा। बाजार में अत्यधिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदाओं के समय एमएसपी एक सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करता है, जो किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
 
4. डिजिटल भुगतान: किसानों को भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाएगा, जिससे पारदर्शी और कुशल वित्तीय लेनदेन सुनिश्चित होगा।
 
5. उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य किसानों को पर्याप्त पारिश्रमिक प्रदान करना, बफर स्टॉक बनाना और आयात पर निर्भरता कम करके उन्हें प्रोत्साहित करना है।
 
6. आयात में कमी: सरकार का अनुमान है कि इस पहल के परिणामस्वरूप चालू वित्तीय वर्ष में भारत के दालों के आयात में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 35% से अधिक की कमी आने की उम्मीद है।
सारांश, यह पहल कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और लाभप्रदता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होती है, साथ ही आयात को कम करने और आवश्यक वस्तुओं का बफर स्टॉक बनाने के लक्ष्य को भी संबोधित करती है।